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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 105
श्लोक
2.22.105
ঈশ্বরের ইচ্ছা সব ঈশ্বর সে জানে
বিশ্বরূপ সন্ন্যাস করিল কত-দিনে
ईश्वरेर इच्छा सब ईश्वर से जाने
विश्वरूप सन्न्यास करिल कत-दिने
अनुवाद
केवल परमेश्वर ही परमेश्वर की इच्छा जानते हैं। कुछ ही समय में विश्वरूप ने संन्यास स्वीकार कर लिया।
Only God knows God's will. Within a short time, Visvarupa accepted renunciation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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