श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.22.104 
বিশ্বরূপ-কথা আদি-খণ্ডেতে বিস্তার
অনন্ত-চরিত্র নিত্যানন্দ-কলেবর
विश्वरूप-कथा आदि-खण्डेते विस्तार
अनन्त-चरित्र नित्यानन्द-कलेवर
 
 
अनुवाद
विश्वरूप के विषय में आदिखण्ड में विस्तारपूर्वक बताया गया है। वे नित्यानंद से अभिन्न हैं, अतः उनके गुण असीमित हैं।
 
The Universal Form is described in detail in the Adikhand. He is inseparable from eternal bliss, and therefore His qualities are limitless.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)