vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
»
श्लोक 102
श्लोक
2.22.102
সর্ব-ভূত-হৃদয ঠাকুর বিশ্বম্ভর
চিন্তিতে অদ্বৈত ঝাট চলিঽ যায ঘর
सर्व-भूत-हृदय ठाकुर विश्वम्भर
चिन्तिते अद्वैत झाट चलिऽ याय घर
अनुवाद
भगवान विश्वम्भर सभी जीवों के हृदय में निवास करते हैं। अद्वैत के ऐसा सोचते ही भगवान अपने घर चले गए।
Lord Visvambhara resides in the hearts of all living beings. As Advaita thought this, the Lord went back to his home.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×