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श्लोक 2.22.102  |
সর্ব-ভূত-হৃদয ঠাকুর বিশ্বম্ভর
চিন্তিতে অদ্বৈত ঝাট চলিঽ যায ঘর |
सर्व-भूत-हृदय ठाकुर विश्वम्भर
चिन्तिते अद्वैत झाट चलिऽ याय घर |
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| अनुवाद |
| भगवान विश्वम्भर सभी जीवों के हृदय में निवास करते हैं। अद्वैत के ऐसा सोचते ही भगवान अपने घर चले गए। |
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| Lord Visvambhara resides in the hearts of all living beings. As Advaita thought this, the Lord went back to his home. |
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