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श्लोक 2.22.100  |
চিন্তযে অদ্বৈত চিত্তে—দেখিঽ বিশ্বম্ভর
“মোর চিত্ত হরে শিশু পরম সুন্দর |
चिन्तये अद्वैत चित्ते—देखिऽ विश्वम्भर
“मोर चित्त हरे शिशु परम सुन्दर |
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| अनुवाद |
| जब अद्वैत ने विश्वम्भर को देखा तो उसने सोचा, "यह अत्यंत आकर्षक बालक मेरा हृदय चुरा रहा है।" |
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| When Advaita saw Vishvambhara, he thought, “This extremely attractive boy is stealing my heart.” |
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