ঽভাগবতে মহা-অধ্যাপকঽ লোকে ঘোষে
মর্ম-অর্থ না জানেন ভক্তি-হীন-দোষে
জানিবার যোগ্যতা আছযে কিছু তান
কোন্ অপরাধে নহে, কৃষ্ণ সে প্রমাণ
ऽभागवते महा-अध्यापकऽ लोके घोषे
मर्म-अर्थ ना जानेन भक्ति-हीन-दोषे
जानिबार योग्यता आछये किछु तान
कोन् अपराधे नहे, कृष्ण से प्रमाण
अनुवाद
लोग उन्हें श्रीमद्भागवतम् के महान आचार्य के रूप में सम्मान देते थे, फिर भी भक्तिहीन होने के कारण वे इसका गूढ़ अर्थ नहीं जान पाए। यद्यपि उनमें समझने की कुछ योग्यता थी, फिर भी वे किसी ऐसे अपराध के कारण, जिसे केवल कृष्ण ही जानते थे, असमर्थ थे।
People respected him as a great teacher of the Srimad Bhagavatam, yet because he lacked devotion, he was unable to grasp its profound meaning. Although he possessed some ability to understand, he was unable to do so due to a transgression known only to Krishna.
तात्पर्य
हालाँकि सामान्य लोग देवानंद पंडित को श्रीमद् भागवतम् के अधिकारी के रूप में सम्मान करते थे, किन्तु चूँकि उनमें सर्वोच्च प्रभु की सेवा करने के प्रति कोई रुचि नहीं थी अतः श्रीमद् भागवतम् के गूढ़ तथ्य को समझने के लिए वह योग्य नहीं थे। हर जीव एक वैष्णव होता है, उसी प्रकार एक जीव के रूप में देवानंद पंडित के पास भी श्रीमद् भागवतम् के गूढ़ अर्थ को समझने की योग्यता थी। किन्तु चूँकि उनमें यह समझ निष्क्रिय थी, इसलिए उन्होंने अज्ञानतावश अपराध किया। यही कारण है कि उस समय उनमें समझने की योग्यता का अभाव था। कृष्ण जीव के हृदय में परमात्मा हैं। इसलिए देवानंद ने श्रीमद् भागवतम् को पढ़ाने और अध्ययन करने के बावजूद किस अपराध के लिए अपराध किया, यह तो केवल कृष्ण जानते थे, अल्पज्ञीव नहीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥