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श्लोक 2.21.27  |
সে-সব লোকের যথা ভাগবতে ভ্রম
তাতে যে অন্যের গর্ব, তার শাস্তা যম |
से-सब लोकेर यथा भागवते भ्रम
ताते ये अन्येर गर्व, तार शास्ता यम |
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| अनुवाद |
| फिर भी यमराज उस व्यक्ति को दण्ड देते हैं जो ऐसे पाठकों का महिमामंडन करता है जिन्होंने श्रीमद्भागवत को गलत समझा है। |
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| Yet Yamaraja punishes the person who glorifies such readers who have misunderstood the Srimad Bhagavatam. |
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