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श्लोक 2.21.1  |
জয জয নিত্যানন্দ-প্রাণ বিশ্বম্ভর
জয গদাধর-পতি, অদ্বৈত-ঈশ্বর |
जय जय नित्यानन्द-प्राण विश्वम्भर
जय गदाधर-पति, अद्वैत-ईश्वर |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद के जीवन और आत्मा, विश्वम्भर की जय हो! गदाधर के गुरु और अद्वैत के स्वामी की जय हो! |
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| Hail Vishvambhara, the life and soul of Nityananda! Hail the guru of Gadadhara and the master of Advaita! |
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