श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 21: भगवान द्वारा देवानंद को प्रताड़ना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.21.1 
জয জয নিত্যানন্দ-প্রাণ বিশ্বম্ভর
জয গদাধর-পতি, অদ্বৈত-ঈশ্বর
जय जय नित्यानन्द-प्राण विश्वम्भर
जय गदाधर-पति, अद्वैत-ईश्वर
 
 
अनुवाद
नित्यानंद के जीवन और आत्मा, विश्वम्भर की जय हो! गदाधर के गुरु और अद्वैत के स्वामी की जय हो!
 
Hail Vishvambhara, the life and soul of Nityananda! Hail the guru of Gadadhara and the master of Advaita!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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