श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.20.96 
জন্মে জন্মে যে-সব করিল আরাধন
সুখে দেখে এবে তাঽর দাস-দাসী-গণ
जन्मे जन्मे ये-सब करिल आराधन
सुखे देखे एबे ताऽर दास-दासी-गण
 
 
अनुवाद
जन्म-जन्मान्तर से भगवान की पूजा करने वालों के सेवक अब इन लीलाओं को आनन्दपूर्वक देख पा रहे थे।
 
The servants of those who had worshipped God since many births were now able to witness these Leelas with joy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)