श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  2.20.90 
কেহ বলে,—ঽজয জযঽ, কেহ বলে,—ঽহরিঽ
কেহ বলে,—“যেন এই রূপ না পাসরি”
केह बले,—ऽजय जयऽ, केह बले,—ऽहरिऽ
केह बले,—“येन एइ रूप ना पासरि”
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, “जय! जय!” और किसी ने कहा, “हरि!” किसी ने कहा, “मैं भगवान के इस रूप को कभी न भूलूँ।”
 
Someone said, "Jai! Jai!" Another said, "Hari!" Another said, "May I never forget this form of God."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)