श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  2.20.88 
স্কন্ধে কমলার নাথ, গুপ্তের নন্দন
রড দিযা পাক ফিরে সকল-অঙ্গন
स्कन्धे कमलार नाथ, गुप्तेर नन्दन
रड दिया पाक फिरे सकल-अङ्गन
 
 
अनुवाद
लक्ष्मीपति को अपनी पीठ पर उठाकर मुरारीगुप्त आँगन में दौड़े।
 
Murari Gupta picked up Lakshmipati on his back and ran into the courtyard.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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