श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  2.20.71 
কৃপা দেখিঽ মুরারি হৈলা অচেতন
মহা-প্রেমে গুপ্ত-গোষ্ঠী করযে ক্রন্দন
कृपा देखिऽ मुरारि हैला अचेतन
महा-प्रेमे गुप्त-गोष्ठी करये क्रन्दन
 
 
अनुवाद
भगवान की यह कृपा देखकर मुरारी अचेत हो गए। तब गुप्ता का पूरा परिवार भगवान के प्रेम में आनंदित होकर रोने लगा।
 
Seeing this grace of God, Murari fell unconscious. Then the entire Gupta family wept in joy, filled with love for God.
तात्पर्य
जब मुरा‍री के घर के लोगो ने श्री महाप्रभु को जल पीते हुए देखा तो वे प्रेम के मारे रोने लगे ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)