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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 67
श्लोक
2.20.67
তুই পাসরিলিঽ তোর পত্নী সব জানে
তুই দিলি, মুঞি বা না খাইব কেমনে?
तुइ पासरिलिऽ तोर पत्नी सब जाने
तुइ दिलि, मुञि वा ना खाइब केमने?
अनुवाद
"तुम भूल गए, पर तुम्हारी पत्नी तो सब जानती है। तुमने मुझे दिया, तो मैं खाने से कैसे मना कर सकता हूँ?"
"You forgot, but your wife knows everything. You gave it to me, so how can I refuse to eat it?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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