vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
»
श्लोक 48
श्लोक
2.20.48
ঽভাইঽ বলিঽ মুরারিরে কৈলা আলিঙ্গন
বড স্নেহ করিঽ বলে সদয বচন
ऽभाइऽ बलिऽ मुरारिरे कैला आलिङ्गन
बड स्नेह करिऽ बले सदय वचन
अनुवाद
भगवान ने मुरारी को गले लगाकर उसे अपना भाई मान लिया और फिर बड़े प्रेम से मुरारी से दयापूर्वक बोले।
God embraced Murari and accepted him as his brother and then spoke to Murari with great love and kindness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×