श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.20.48 
ঽভাইঽ বলিঽ মুরারিরে কৈলা আলিঙ্গন
বড স্নেহ করিঽ বলে সদয বচন
ऽभाइऽ बलिऽ मुरारिरे कैला आलिङ्गन
बड स्नेह करिऽ बले सदय वचन
 
 
अनुवाद
भगवान ने मुरारी को गले लगाकर उसे अपना भाई मान लिया और फिर बड़े प्रेम से मुरारी से दयापूर्वक बोले।
 
God embraced Murari and accepted him as his brother and then spoke to Murari with great love and kindness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)