vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
»
श्लोक 45
श्लोक
2.20.45
গুপ্ত-লক্ষ্যে সবারে শিখায ভগবান্
“সত্য মোর বিগ্রহ, সেবক, লীলা, স্থান”
गुप्त-लक्ष्ये सबारे शिखाय भगवान्
“सत्य मोर विग्रह, सेवक, लीला, स्थान”
अनुवाद
मुरारी को उपदेश देकर, परमेश्वर ने सबको सिखाया, “मेरा रूप, सेवक, लीलाएँ और धाम सभी शाश्वत हैं।”
By preaching to Murari, the Supreme Lord taught everyone, “My form, servants, pastimes and abode are all eternal.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×