श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.20.4 
এই মতে প্রতি-দিনে অশেষ কৌতুক
ভক্ত-সঙ্গে গৌরচন্দ্র করে নানা-রূপ
एइ मते प्रति-दिने अशेष कौतुक
भक्त-सङ्गे गौरचन्द्र करे नाना-रूप
 
 
अनुवाद
इस प्रकार प्रतिदिन भगवान गौरचन्द्र भक्तों के साथ असीमित लीलाएँ करते थे।
 
In this way, Lord Gaurachandra performed unlimited pastimes with his devotees every day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)