श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.20.31 
প্রভু বলে,—“আরে বেটা জাতি গেল তোর
তোর অঙ্গে উচ্ছিষ্ট লাগিল সব মোর”
प्रभु बले,—“आरे बेटा जाति गेल तोर
तोर अङ्गे उच्छिष्ट लागिल सब मोर”
 
 
अनुवाद
प्रभु ने कहा, "तुम्हारी जाति नष्ट हो गई है। मेरे अवशेषों को छूने से तुम दूषित हो गए हो।"
 
The Lord said, "Your race is destroyed. You have been contaminated by touching my remains."
तात्पर्य
स्मृतियों के अनुसार जो व्यक्ति किसी दूसरे का जूठा खाता है वह अपनी जाति खराब करता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)