श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.20.30 
প্রভু বলে,—“মুরারি সকালে ধোও হাত”
মুরারি তুলিযা হস্ত দিলেক মথাঽত
प्रभु बले,—“मुरारि सकाले धोओ हात”
मुरारि तुलिया हस्त दिलेक मथाऽत
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "हे मुरारी, जल्दी से जाकर हाथ धो लो।" फिर भी मुरारी ने केवल अपने सिर पर हाथ पोंछे।
 
The Lord said, "O Murari, go quickly and wash your hands." Yet Murari only wiped his hands on his head.
तात्पर्य
यहाँ शब्द साकाळे का अर्थ है "बिना किसी विलंब के" या "जल्दी से"।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)