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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 156
श्लोक
2.20.156
নিত্যানন্দ-প্রভু-মুখে বৈষ্ণবের তথ্য
কিছু কিছু শুনিলাম সবার মাহাত্ম্য
नित्यानन्द-प्रभु-मुखे वैष्णवेर तथ्य
किछु किछु शुनिलाम सबार माहात्म्य
अनुवाद
मैंने नित्यानंद प्रभु के मुख से वैष्णवों की महिमा और विशेषताओं के बारे में कुछ सुना है।
I have heard something about the glory and characteristics of Vaishnavas from the mouth of Nityananda Prabhu.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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