श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  2.20.152 
চৈতন্য-চরণে যাঽর আছে মতি-গতি
জন্ম জন্ম হয যেন তাঙ্হার সṁহতি
चैतन्य-चरणे याऽर आछे मति-गति
जन्म जन्म हय येन ताङ्हार सꣳहति
 
 
अनुवाद
मैं उन लोगों की संगति प्राप्त करूँ जिनकी इच्छाएँ और कार्य भगवान चैतन्य के चरणकमलों को समर्पित हैं।
 
May I attain the association of those whose desires and actions are dedicated to the lotus feet of Lord Chaitanya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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