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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 151
श्लोक
2.20.151
এই নবদ্বীপে গৌরচন্দ্রের প্রকাশ
না মানেঽ নিন্দক-সব সে সত্য বিলাস
एइ नवद्वीपे गौरचन्द्रेर प्रकाश
ना मानेऽ निन्दक-सब से सत्य विलास
अनुवाद
गौरचन्द्र ने इसी नवद्वीप में अपनी लीलाएँ प्रकट कीं, फिर भी निन्दक लोग ऐसी शाश्वत लीलाओं को स्वीकार नहीं करते।
Gaurachandra revealed his pastimes in this very Navadvipa, yet the critics do not accept such eternal pastimes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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