श्रीमद्भागवत का अध्ययन करने के बाद भी मनुष्य की बुद्धि नष्ट हो सकती है, क्योंकि जो कोई नित्यानंद की निन्दा करता है, वह निश्चित रूप से पराजित होता है।
Even after studying the Srimad Bhagavatam, one's intellect can be destroyed, because anyone who slanders Nityananda is certainly defeated.
तात्पर्य
बहुत से पेशेवर भागवत भाष्यकार, जो परमेश्वर और उनके भक्तों की निंदा करने में लिप्त होते हैं, अपनी आजीविका कमाने और बिना किसी रोक-टोक के इंद्रिय-सुख भोगने के लिए श्रीमद् भागवतम के अर्थ को बिगाड़कर इस दुनिया में तबाही मचाते हैं और इस प्रकार वे स्वयं अपना विनाश करते हैं। वे वैष्णव गुरुदेव के चरण-कमलों का त्याग कर मायावादी, ज्ञानी, कर्मकाण्डी और घोर भौतिकवादी को, जो कि श्री नित्यानंद के चरणों में अपराधी हैं, अपने आध्यात्मिक गुरु मानते हैं और इस तरह वे परमेश्वर की दया पाने से सर्वदा वंचित रह जाते हैं। साथ ही, बहुत से लोगों को सनातन धार्मिक सिद्धांतों का पालन करने से रोककर, वे उन्हें भौतिक अस्तित्व के कष्ट झेलने पर मजबूर करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥