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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 15
श्लोक
2.20.15
নিত্যানন্দ-শিরে দেখে মহা-নাগ-ফনাকরে
দেখে শ্রী-হল-মুষল তান বানা
नित्यानन्द-शिरे देखे महा-नाग-फनाकरे
देखे श्री-हल-मुषल तान वाना
अनुवाद
उन्होंने देखा कि एक विशाल सर्प नित्यानंद के सिर पर अपना फन फैलाए हुए है, जिसके हाथों में हल और गदा है।
He saw a huge serpent spreading its hood over the head of Nityananda, who had a plough and a mace in his hands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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