श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  2.20.149 
চারি-বেদ পডিযা ও যদি নিন্দা করে
জন্ম জন্ম কুম্ভীপাকে ডুবিযা সে মরে
चारि-वेद पडिया ओ यदि निन्दा करे
जन्म जन्म कुम्भीपाके डुबिया से मरे
 
 
अनुवाद
यदि कोई व्यक्ति चारों वेदों का अध्ययन करने के बाद भी ईशनिंदा में लिप्त रहता है, तो वह जन्म-जन्मान्तर में कुम्भीपाक नामक नरक में कष्ट भोगता है।
 
If a person continues to indulge in blasphemy even after studying all the four Vedas, he suffers in the hell called Kumbhipaka in many births.
तात्पर्य
भले ही अपने अपराधों से罪 कर्म करनेवाले स्वयं को चतुर्वेदी और अग्निहोत्री बताएँ, पर विष्णु और वैष्णवों की निन्दा करने से वे हर जन्म के बाद कुम्भीपाक में गिरते हैं, जहाँ उन्हें भयंकर दुःख सहना पड़ता है। चारों वेदों का अध्ययन उनके लिए नारकीय पीडा का कारण बन जाता है, और वैष्णवों की ईर्ष्या करना उनका सामावेद का प्रमुख पाठ बन जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)