श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  2.20.129 
আথে-ব্যথে মুরারি পডিলা ভূমি-তলে
পাখালিল প্রভুর চরণ প্রেম-জলে
आथे-व्यथे मुरारि पडिला भूमि-तले
पाखालिल प्रभुर चरण प्रेम-जले
 
 
अनुवाद
मुरारी तुरन्त भूमि पर गिर पड़े और प्रेमाश्रुओं से भगवान के चरणकमल धोये।
 
Murari immediately fell on the ground and washed the Lord's feet with tears of love.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)