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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा
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श्लोक 124
श्लोक
2.20.124
প্রভু বলে,—“গুপ্ত, এই তোমার ব্যবহার!
কোন্ দোষে আমাঽ ছাডিঽ চাহ যাইবার?
प्रभु बले,—“गुप्त, एइ तोमार व्यवहार!
कोन् दोषे आमाऽ छाडिऽ चाह याइबार?
अनुवाद
प्रभु बोले, "हे मुरारी! तुम तो ऐसे ही आचरण करते हो! मेरे किस दोष के कारण तुम मुझे छोड़ना चाहते हो?"
The Lord said, "Oh Murari! You behave like this! Because of which fault of mine you want to leave me?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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