श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 122
 
 
श्लोक  2.20.122 
যে গডিযা দিল কাতি তাহা জানি আমি
তাহা জানি, যথা কাতি থুইযাছ তুমি”
ये गडिया दिल काति ताहा जानि आमि
ताहा जानि, यथा काति थुइयाछ तुमि”
 
 
अनुवाद
“मुझे पता है कि उस हेलिकॉप्टर को किसने बनाया है और तुमने उसे कहां छिपाया है।”
 
“I know who made that helicopter and where you hid it.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)