श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 115
 
 
श्लोक  2.20.115 
সত্বরে আইলা প্রভু মুরারি-ভবন
সম্ভ্রমে করিল গুপ্ত চরণ-বন্দন
सत्वरे आइला प्रभु मुरारि-भवन
सम्भ्रमे करिल गुप्त चरण-वन्दन
 
 
अनुवाद
भगवान शीघ्र ही मुरारी के घर आये और मुरारी ने भगवान के चरणों में आदरपूर्वक प्रणाम किया।
 
The Lord soon came to Murari's house and Murari respectfully bowed at the Lord's feet.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)