श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  2.20.104 
এই মত মুরারি-গুপ্তের পুণ্য কথা
আর কত আছে, যে কৈলা যথা যথা
एइ मत मुरारि-गुप्तेर पुण्य कथा
आर कत आछे, ये कैला यथा यथा
 
 
अनुवाद
मुरारीगुप्त के विषय में ऐसे ही शुभ प्रसंग हैं। अभी और भी बहुत से प्रसंगों का वर्णन करना बाकी है।
 
Such are the auspicious events concerning Murarigupta. Many more remain to be described.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)