श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  2.20.103 
ধন্য ভক্ত মুরারি, সফল বিষ্ণু-ভক্তি
বিশ্বম্ভর-লীলার বহনে যাঽর শক্তি
धन्य भक्त मुरारि, सफल विष्णु-भक्ति
विश्वम्भर-लीलार वहने याऽर शक्ति
 
 
अनुवाद
मुरारी गुप्त एक अत्यंत प्रतापी भक्त थे। उनकी भगवान की भक्ति फलदायी थी, क्योंकि उनमें विश्वम्भर को अपनी लीलाओं में ले जाने की क्षमता थी।
 
Murari Gupta was a very illustrious devotee. His devotion to the Lord was fruitful, as he had the ability to take Vishvambhara into his pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)