श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 20: मुरारी गुप्त की महिमा  »  श्लोक 100
 
 
श्लोक  2.20.100 
বাহ্য পাইঽ নাম্বিলা গৌরাঙ্গ মহাধীর
গুপ্তের গরুড-ভাব হৈল সুস্থির
बाह्य पाइऽ नाम्बिला गौराङ्ग महाधीर
गुप्तेर गरुड-भाव हैल सुस्थिर
 
 
अनुवाद
अपनी बाह्य चेतना पुनः प्राप्त करते ही, परम शांत गौरांग मुरारी की पीठ से उतर गए और मुरारी की गरुड़ जैसी मनोदशा लुप्त हो गई।
 
Upon regaining his external consciousness, the supremely calm Gauranga got down from Murari's back and Murari's Garuda-like state of mind vanished.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)