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श्लोक 2.20.1  |
জয জয গৌরসিṁহ শ্রী-শচী-কুমার
জয সর্ব-তাপ-হর চরণ তোমার |
जय जय गौरसिꣳह श्री-शची-कुमार
जय सर्व-ताप-हर चरण तोमार |
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| अनुवाद |
| शचीपुत्र गौरसिंह की जय हो! आपके चरणकमलों की जय हो, जो समस्त दुःखों को हर लेते हैं! |
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| Victory to Gaurasimha, the son of Shachi! Victory to your lotus feet, which dispel all sorrows! |
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