श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.19.84 
জাহ্নবীর মজ্জনে ঘুচিল পথ-শ্রম
ফলাহার করিতে বসিলা দুই-জন
जाह्नवीर मज्जने घुचिल पथ-श्रम
फलाहार करिते वसिला दुइ-जन
 
 
अनुवाद
गंगा में स्नान करके यात्रा से निवृत्त होकर दोनों प्रभु आये और फल खाने बैठे।
 
After bathing in the Ganga and retiring from their journey, both the Lords came and sat down to eat fruits.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)