श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.19.82 
সন্ন্যাসী বলযে,—“স্নান কর এইখানে
কিছু খাইঽ স্নিগ্ধ হৈঽ করহ গমনে”
सन्न्यासी बलये,—“स्नान कर एइखाने
किछु खाइऽ स्निग्ध हैऽ करह गमने”
 
 
अनुवाद
संन्यासी ने कहा, “यहाँ स्नान करो, कुछ खाओ, तरोताजा हो जाओ, और फिर जाओ।”
 
The monk said, “Take a bath here, eat something, freshen up, and then go.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)