श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  2.19.63 
শুন শুন গোসাঞি ইহার হেতু—কর্ম
কোন্ মহাপুরুষে সে জানে এই মর্ম
शुन शुन गोसाञि इहार हेतु—कर्म
कोन् महापुरुषे से जाने एइ मर्म
 
 
अनुवाद
"सुनो गोसाणी! इसका कारण कर्म है। कौन महापुरुष इसे यथार्थ रूप से जानता है?
 
"Listen, Gosani! The cause of this is karma. Which great man truly knows this?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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