श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.19.62 
জ্বরের লাগিযা কেহ কামনা না করে
তবে কেন জ্বর আসিঽ পীডযে শরীরে
ज्वरेर लागिया केह कामना ना करे
तबे केन ज्वर आसिऽ पीडये शरीरे
 
 
अनुवाद
"बुखार कोई नहीं चाहता। फिर बुखार क्यों आता है और शरीर को क्यों पीड़ित करता है?"
 
"Nobody wants a fever. Then why does a fever come and torment the body?"
तात्पर्य
"यदि केवल कामना करने मात्र से ही कोई वरदान प्राप्त हो जाता तो फिर बिना मांगे रोग क्यों उत्पन्न होकर शरीर को दुःख देता है ? बिना मांगे ही कोई वस्तु स्वतः ही प्राप्त हो जाती है और बिना मांगे भी कोई वस्तु प्राप्त न होने से कामना की निष्फलता सिद्ध हो जाती है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)