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श्लोक 2.19.58  |
হাসে প্রভু, সন্ন্যাসীর বচন শুনিযা
শ্রী-হস্ত দিলেন নিজ কপালে তুলিযা |
हासे प्रभु, सन्न्यासीर वचन शुनिया
श्री-हस्त दिलेन निज कपाले तुलिया |
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| अनुवाद |
| संन्यासी के वचन सुनकर भगवान मुस्कुराये और अपना हाथ माथे पर रख लिया। |
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| Hearing the words of the monk, God smiled and placed his hand on his forehead. |
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