vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 45
श्लोक
2.19.45
নিত্যানন্দ বলে,—“প্রভু, সন্ন্যাসী-আলয”
প্রভু বলে,—“তাঽরে দেখি, যদি ভাগ্য হয”
नित्यानन्द बले,—“प्रभु, सन्न्यासी-आलय”
प्रभु बले,—“ताऽरे देखि, यदि भाग्य हय”
अनुवाद
नित्यानंद ने उत्तर दिया, “हे प्रभु, यह एक संन्यासी का घर है।” तब प्रभु ने कहा, “यदि हम भाग्यशाली रहे, तो हम उनसे मिल सकते हैं।”
Nityananda replied, “O Lord, this is the home of a sannyasi.” Then the Lord said, “If we are lucky, we may meet him.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×