श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 274
 
 
श्लोक  2.19.274 
শ্রী-কৃষ্ণ-চৈতন্য-নিত্যানন্দ-চাঙ্দ জান
বৃন্দাবন-দাস তছু পদ-যুগে গান
श्री-कृष्ण-चैतन्य-नित्यानन्द-चाङ्द जान
वृन्दावन-दास तछु पद-युगे गान
 
 
अनुवाद
मैं, वृन्दावनदास, श्री कृष्ण चैतन्य और नित्यानन्द प्रभु को अपना जीवन और आत्मा मानकर उनके चरणकमलों की महिमा का गान करता हूँ।
 
I, Vrindavan Das, consider Sri Krishna Chaitanya and Nityananda Prabhu as my life and soul and sing the glories of their lotus feet.
 
इस प्रकार श्री चैतन्य-भागवत, मध्य-खण्ड, अध्याय उन्नीस - "अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ" सम
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)