श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 235
 
 
श्लोक  2.19.235 
অদ্বৈতের হাতে ধরিঽ নিত্যানন্দ-সঙ্গে
চলিলা ভোজন-গৃহে বিশ্বম্ভর-রঙ্গে
अद्वैतेर हाते धरिऽ नित्यानन्द-सङ्गे
चलिला भोजन-गृहे विश्वम्भर-रङ्गे
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात विश्वम्भर ने अद्वैत का हाथ पकड़ा और नित्यानंद के साथ भोजन कक्ष में चले गए।
 
Then Visvambhara took Advaita's hand and went to the dining room with Nityananda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)