श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.19.23 
বিষ্ণু-ভক্তি—দর্পণ, লোচন হয—ঽজ্ঞানঽ
চক্ষু-হীন জনের দর্পণে কোন্ কাম?
विष्णु-भक्ति—दर्पण, लोचन हय—ऽज्ञानऽ
चक्षु-हीन जनेर दर्पणे कोन् काम?
 
 
अनुवाद
"विष्णु की भक्ति दर्पण के समान है, जबकि ज्ञान आँखों के समान है। यदि आँखें ही न हों तो दर्पण का क्या उपयोग है?
 
"Devotion to Vishnu is like a mirror, while knowledge is like eyes. What is the use of a mirror if there are no eyes?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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