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श्लोक 2.19.23  |
বিষ্ণু-ভক্তি—দর্পণ, লোচন হয—ঽজ্ঞানঽ
চক্ষু-হীন জনের দর্পণে কোন্ কাম? |
विष्णु-भक्ति—दर्पण, लोचन हय—ऽज्ञानऽ
चक्षु-हीन जनेर दर्पणे कोन् काम? |
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| अनुवाद |
| "विष्णु की भक्ति दर्पण के समान है, जबकि ज्ञान आँखों के समान है। यदि आँखें ही न हों तो दर्पण का क्या उपयोग है? |
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| "Devotion to Vishnu is like a mirror, while knowledge is like eyes. What is the use of a mirror if there are no eyes? |
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