श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  2.19.220 
দুর্বিজ্ঞেয বিষ্ণু-বৈষ্ণবের বাক্য-কর্ম
তান অনুগ্রহে সে বুঝিযে তার মর্ম
दुर्विज्ञेय विष्णु-वैष्णवेर वाक्य-कर्म
तान अनुग्रहे से बुझिये तार मर्म
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु और वैष्णवों के वचन और कार्य समझ से परे हैं। केवल उनकी कृपा से ही उन्हें समझा जा सकता है।
 
The words and actions of Lord Vishnu and the Vaishnavas are beyond comprehension. They can only be understood by His grace.
तात्पर्य
जगत में जितने शब्द प्रचलित हैं, वे सभी भौतिक पदार्थों के द्योतक हैं। भौतिक क्रियाएँ कर्ता को फल देने के लिए होती हैं। किंतु विष्णु और वैष्णवों के शब्द ऐसे नहीं होते हैं। उनकी क्रियाएँ भी वैष्णव और विष्णु न होनेवालों की क्रियाओं जैसी नहीं होती हैं। विष्णु और वैष्णवों के शब्दों और क्रियाओं तथा दूसरों के शब्दों और क्रियाओं में यह अंतर है कि वे इन्द्रिय ज्ञान के वशीभूत होते हैं, और ये इन्द्रिय ज्ञान के वश से परे होते हैं। विष्णु और वैष्णवों की कृपा से ही उस समझने में कठिन राज्य में प्रवेश करने की योग्यता प्राप्त हो सकती है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)