श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 218
 
 
श्लोक  2.19.218 
অদ্বৈতের বাক্য বুঝিবার শক্তি কার
জানিহ ঈশ্বর-সনে ভেদ নাহি যার
अद्वैतेर वाक्य बुझिबार शक्ति कार
जानिह ईश्वर-सने भेद नाहि यार
 
 
अनुवाद
अद्वैत के शब्दों को समझने की शक्ति किसमें है? उसे यह जानना चाहिए कि उसमें और परमेश्वर में कोई अंतर नहीं है।
 
Who has the power to understand the words of Advaita? He must know that there is no difference between himself and God.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)