vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 217
श्लोक
2.19.217
অদ্বৈতের প্রেমে ভাসে সকল মেদিনী
এই মত মহাচিন্ত্য অদ্বৈত-কাহিনী
अद्वैतेर प्रेमे भासे सकल मेदिनी
एइ मत महाचिन्त्य अद्वैत-काहिनी
अनुवाद
सारा जगत अद्वैत के आनंदमय प्रेम में तैर रहा था। ऐसे हैं अद्वैत के अकल्पनीय विषय।
The entire universe was floating in the blissful love of non-duality. Such are the unimaginable themes of non-duality.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×