श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.19.21 
ঽজ্ঞানঽ বিনা কিবাশক্তি ধরে বিষ্ণু-ভক্তি
অতএব সবার প্রাণ, জ্ঞান—সর্ব-শক্তি
ऽज्ञानऽ विना किबाशक्ति धरे विष्णु-भक्ति
अतएव सबार प्राण, ज्ञान—सर्व-शक्ति
 
 
अनुवाद
"ज्ञान के बिना, भगवान विष्णु की भक्ति में क्या शक्ति है? इसलिए ज्ञान में सर्वशक्ति है, और यह सबका जीवन है।"
 
"Without knowledge, what power is there in devotion to Lord Vishnu? Therefore knowledge is omnipotent, and it is the life of all."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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