সর্ব-দেব-মূল তুমি সবার ঈশ্বর
দৃশ্যাদৃশ্য যত—সব তোমার কিঙ্কর
প্রভুরে লঙ্ঘিযা যে দাসেরে ভক্তি করে
পূজা খাইঽ সেই দাস তাহারে সṁহারে
सर्व-देव-मूल तुमि सबार ईश्वर
दृश्यादृश्य यत—सब तोमार किङ्कर
प्रभुरे लङ्घिया ये दासेरे भक्ति करे
पूजा खाइऽ सेइ दास ताहारे सꣳहारे
अनुवाद
आप सभी देवताओं के मूल और सबके नियन्ता हैं। सभी जीव, चाहे दृश्य हों या अदृश्य, आपके सेवक हैं। हे प्रभु, यदि कोई आपकी उपेक्षा करके आपके सेवक को भक्तिपूर्वक भेंट चढ़ाता है, तो वह सेवक उस भेंट को ग्रहण करके उस उपासक का वध कर देता है।
You are the origin of all gods and the controller of all. All beings, whether visible or invisible, are your servants. O Lord, if someone ignores you and offers a devotional offering to your servant, that servant accepts the offering and kills the worshipper.
तात्पर्य
हे विश्वंभर चैतन्यदेव, आप सभी देवताओं के मूल स्रोत हैं। आप सभी नियंत्रकों के परम नियंत्रक हैं। आप प्रेम के सागर हैं। प्रकट और अप्रकट सभी लोकों की सजीव संस्थाएं आपके प्राधिकार के अधीन विभिन्न गतिविधियों में भाग लेने के द्वारा आपके सेवकों के रूप में कार्य करती हैं। आपके कुछ सेवक हरि की सेवा से विमुख सजीव संस्थाओं के समक्ष उनके कामुक ज्ञान की वस्तुओं के रूप में प्रकट होते हैं और उनके इंद्रिय संतुष्टि के लिए ईंधन के समान बन जाते हैं। हरि की सेवा से विमुख वे लालची, अज्ञानी लोग सर्वोच्च भगवान के प्रति सेवा का कोई रवैया प्रदर्शित नहीं करते हैं और आश्वस्त होते हैं कि हरि के प्रति घृणा पूरी तरह से उचित है। ऐसे सेवक ऐसे लोगों को गुमराह करते हैं और उन्हें आपका अनादर करना सिखाते हैं, जबकि वास्तव में आप सभी प्रकट और अप्रकट वस्तुओं के लिए सर्वोच्च पूजनीय वस्तु हैं जो बाहरी धारणा से उत्प्रेरित हैं। सर्वोच्च भगवान के ऐसे योग्य सेवक अपने-अपने कपटी उपासकों से अपनी इंद्रियों को संतुष्ट करने के लिए सामग्री एकत्र करते हैं और उन उपासकों को कृष्ण की सेवा से और अधिक विमुख कर देते हैं। कामुक ज्ञान से जन्मे उन उपासकों की वासनामय बाहरी अवधारणाएं उनके झूठे आधिपत्य भाव को बढ़ाकर उन्हें नष्ट कर देती हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥