vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
»
श्लोक 184
श्लोक
2.19.184
শুনিযা দুঃখিত হৈল মহা-শৈব-মূর্তি
বুঝিলেন ইহার ইচ্ছার নাহি পূর্তি
शुनिया दुःखित हैल महा-शैव-मूर्ति
बुझिलेन इहार इच्छार नाहि पूर्ति
अनुवाद
यह आदेश सुनकर शिवजी की रचना करने वाला वह महादैत्य व्याकुल हो गया। उसे यह समझ में आ गया कि राजा की इच्छा पूरी नहीं हो सकती।
Hearing this command, the great demon who had created Lord Shiva became distraught. He realized that the king's wish could not be fulfilled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×