श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 164
 
 
श्लोक  2.19.164 
অদ্বৈতের ভক্তি দেখিঽ নিত্যানন্দ-রায
ক্রন্দন করযে যেন নদী বহিঽ যায
अद्वैतेर भक्ति देखिऽ नित्यानन्द-राय
क्रन्दन करये येन नदी वहिऽ याय
 
 
अनुवाद
अद्वैत की भक्ति देखकर नित्यानंद प्रभु इतना रोये कि ऐसा लगा जैसे उनकी आँखों से नदी बह रही हो।
 
Seeing Advaita's devotion, Nityananda Prabhu cried so much that it seemed as if a river was flowing from his eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)