श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 163
 
 
श्लोक  2.19.163 
সম্ভ্রমে উঠিযা কোলে কৈল বিশ্বম্ভর
অদ্বৈতেরে কোলে করিঽ কান্দযে নির্ভর
सम्भ्रमे उठिया कोले कैल विश्वम्भर
अद्वैतेरे कोले करिऽ कान्दये निर्भर
 
 
अनुवाद
विश्वम्भर ने आदरपूर्वक अद्वैत को उठाया और उसे गले लगाते हुए खूब रोये।
 
Vishvambhar respectfully picked up Advaita and cried a lot while hugging him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)