श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ  »  श्लोक 157
 
 
श्लोक  2.19.157 
“কোথা গেল এবে মোরে তোমার সে স্তুতি?
কোথা গেল এবে তোর সে সব ঢাঙ্গাতি?
“कोथा गेल एबे मोरे तोमार से स्तुति?
कोथा गेल एबे तोर से सब ढाङ्गाति?
 
 
अनुवाद
"अब कहाँ गया तुम्हारा मेरा महिमामंडन? अब कहाँ गया तुम्हारा सारा कपटपूर्ण व्यवहार?
 
"Where is your glorification of me now? Where is all your deceitful behavior now?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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