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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 19: अद्वैत आचार्य के घर में भगवान की लीलाएँ
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श्लोक 139
श्लोक
2.19.139
ক্রোধে প্রভু পতি-ব্রতা-বাক্য নাহি শুনে
তর্জে গর্জে অদ্বৈতেরে সদম্ভ-বচনে
क्रोधे प्रभु पति-व्रता-वाक्य नाहि शुने
तर्जे गर्जे अद्वैतेरे सदम्भ-वचने
अनुवाद
क्रोध में भगवान ने एक पतिव्रता स्त्री के लिए उचित वचन न सुने। उन्होंने दहाड़कर अद्वैत को गर्व से भरे शब्दों में धमकाया।
In anger, the Lord did not listen to the words appropriate for a devoted wife. He roared and threatened Advaita with arrogant words.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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